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Showing posts from November, 2023

आत्मा नहीं मर जाए...

*आत्मा नहीं मर जाए...* जिंदगी में अंधेरे की स्याही, कभी कभी चिरागों के हौंसले, और हिम्मत के घौंसले, पस्त कर देती है, लेकिन बिना इम्तिहान, कहां बनती है खास पहचान, अगर विश्वास न हो, तो एक छोटा काम करो, लगा कर सपनों के उड़ान में आग, खुद को गुमनाम करो, किसी को ठेंगा फर्क नहीं पड़ता, तुम जियो चाहे मरो, लेकिन इतिहास में एक बात खास है, निरंतर प्रयास सफलता का राज है, चंद कीड़े मकोड़े तुम्हें भटकाने आएंगे, जिन्हें खुद का रास्ता पता नहीं, वो भी रास्ता दिखाने आएंगे, मगर ज्यादा तुम जज्बाती नहीं होना, रखना संयम आपा नहीं खोना, किसी का वक्त आता है, तुम्हारा शायद दौड़ आयेगा, आज हर पग पर कांटे बोने वाले, कल तुम्हारे संघर्ष का गीत गायेगा, मगर खुद को इतना ऊपर नहीं उठाना है, कि खुद की नजरों में हम खुद गिर जाएं, गिराने वाले को ऐसे भी बेमौत मरना है, लेकिन उसकी खातिर हमारी आत्मा नहीं मर जाए, ✍🏻 *विपिन वियान हिंदुस्तानी*

छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब

*छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब...* कोई बीमारी नहीं, बिहारी हैं साहब,  छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब,  लोगों के हौंसले जहां टूट जाते हैं, हर पल झेलने की आदत होती है हमें, सिलेबस स्ट्रेटजी बताने वाले लोग भले न हो,  पढ़ाई का कोई स्कोप नहीं,  यह बताने वाले चारों ओर कई ज्ञानी हैं साहब, छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब,  बापू से पैसे मांगने की हमारी हिम्मत नहीं होती,  क्योंकि उन्हें भी किसी दुष्ट महाजन से मांगना होगा, छोटे भाई बहन के अरमानों का गला काटना होगा,  अपनी बीमारी का ईलाज टालना होगा,  मां के जज्बाती उम्मीदों को शिद्दत से पालना होगा, मुश्किलों के तूफान में हौसलों का उड़ान भारी है साहब, छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब, मकई का सत्तुआ, आम का आचार, जनरल बॉगी में होकर सवार, लॉज में रहने की खातिर करना जुगाड़, कॉन्वेंट के विलायती छोकरों से लड़ाई आर पार, बड़ी कठिन लड़ाई है साहब, छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब, खुद को मैं नहीं, न जाने क्यों हम बोलते हैं, लोग उड़ाते हैं मज़ाक इसलिए कम बोलते हैं, बिल्कुल लो स्टैंडर्ड लेकिन थिंकिंग हाई, कॉन्फिडेंस से लबरेज, खाली वेकेंसी तो...