*छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब...* कोई बीमारी नहीं, बिहारी हैं साहब, छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब, लोगों के हौंसले जहां टूट जाते हैं, हर पल झेलने की आदत होती है हमें, सिलेबस स्ट्रेटजी बताने वाले लोग भले न हो, पढ़ाई का कोई स्कोप नहीं, यह बताने वाले चारों ओर कई ज्ञानी हैं साहब, छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब, बापू से पैसे मांगने की हमारी हिम्मत नहीं होती, क्योंकि उन्हें भी किसी दुष्ट महाजन से मांगना होगा, छोटे भाई बहन के अरमानों का गला काटना होगा, अपनी बीमारी का ईलाज टालना होगा, मां के जज्बाती उम्मीदों को शिद्दत से पालना होगा, मुश्किलों के तूफान में हौसलों का उड़ान भारी है साहब, छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब, मकई का सत्तुआ, आम का आचार, जनरल बॉगी में होकर सवार, लॉज में रहने की खातिर करना जुगाड़, कॉन्वेंट के विलायती छोकरों से लड़ाई आर पार, बड़ी कठिन लड़ाई है साहब, छात्र थोड़ा अनाड़ी हैं साहब, खुद को मैं नहीं, न जाने क्यों हम बोलते हैं, लोग उड़ाते हैं मज़ाक इसलिए कम बोलते हैं, बिल्कुल लो स्टैंडर्ड लेकिन थिंकिंग हाई, कॉन्फिडेंस से लबरेज, खाली वेकेंसी तो...
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